उत्तर भारतीयों को चाहिए आरक्षण: उत्तर भारतीयों को चाहिए महाराष्ट्र में आरक्षण का लाभ, राज्य सरकार पिछड़ा आयोग को भेजेगा सिफारिश पत्र – obc from north indian states who have been living in maharashtra since birth wants reservation

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मुंबई
मुंबई मेट्रोपॉलिटन सहित महाराष्ट्र भर में रहने वाले उत्तर भारतीयों को महाराष्ट्र में राजनीतिक, शैक्षणिक और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ चाहिए। इस संबंध में ओबीसी मंत्री विजय वडेट्टीवार ने केंद्रीय पिछड़ा आयोग को सिफारिश पत्र लिखने का वादा किया है।

उत्तर प्रदेश और बिहार के मूल निवासी पाल, विश्वकर्मा, मौर्य-कुशवाहा, कुर्मी-पटेल, यादव, राजभर, चौरसिया, प्रजापति, गुप्ता-तेली, शर्मा-नाई, सुवर्णकार-सोनार, लोधी समाज सहित अन्य जातियों को महाराष्ट्र में आरक्षण का लाभ चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क है कि, इस समाज के लोग कई सालों से महाराष्ट्र में रह रहे हैं। उन्हें उनके राज्यों में आरक्षण का लाभ मिलता है। केंद्र सरकार भी आरक्षण देती है, लेकिन इन जातियों में जिनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ है, उन्हें महाराष्ट्र के आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, जबकि उन्हीं के जाति के लोगों को (महाराष्ट्र के मूल निवासी) आरक्षण मिल रहा है, तो उन्हें भी इसका लाभ मिलना चाहिए।

इसी मांग को लेकर गुरुवार को कांग्रेस नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीम खान के नेतृत्व में इन सभी जातियों के प्रतिनिधि मंडल महाविकास आघाडी सरकार के ओबीसी मंत्री विजय वडेट्टीवार से मुलाकात की। नसीम खान ने मांग की कि उत्तर भारत से आए विविध पिछड़ी जातियों को महाराष्ट्र के ओबीसी, एसटी, एसटी, एनटी लिस्ट में शामिल करना चाहिए, ताकि इस समाज को भी महाराष्ट्र की मुख्यधारा मे जोड़ा जा सके। इस पर मंत्री विजय वडेट्टीवार ने अधिकारियों को पिछड़ा आयोग को सिफारिश पत्र भेजने का आदेश दिया।

इस बात पर भी उनकी चर्चा मंत्री वडेट्टीवार से हुई। बैठक में मंत्री विजय वडेट्टीवार, पूर्व मंत्री नसीम खान, उमाकांत अग्निहोत्री सहित अन्य समाज के डॉ. बाबूलाल सिंह, प्रदुम्न यादव, गंगाराम विश्वकर्मा, डॉ़ उत्तम सिंह, अनिल राजभर, विनोद गुप्ता, संतोष विश्वकर्मा, रामजी बिंद, रामलखन पाल, नरेंद्र कुमार सिंह, अशोक शर्मा, रामनरेश यादव, राजेश पाल, शैलेश चौरसिया, समर बहादुर पटेल, धर्मराज प्रजापति, छोटेलाल शर्मा आदि समाज के प्रमुख नेताओं के साथ ओबीसी, मागासवर्गीय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

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