अयोध्या के लिए ऐतिहासिक दिन, 28 साल बाद बाबरी विध्वंस मामले में फैसला आज | lucknow – News in Hindi

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लखनऊ. अयोध्या के विवादित ढांचा बाबरी विध्वंस (Babri Demolition Case) मामले में 30 सितंबर यानी बुधवार का दिन काफी अहम है. सीबीआई (CBI) के विशेष जज एसके यादव बुधवार को ही अपना फैसला सुनाएंगे. यह जस्टिस एसके यादव का आखिरी फैसला होगा, क्योंकि वे 30 सितंबर को ही रिटायर हो रहे हैं. सुबह 11 बजे कोर्ट की कार्यवाही शुरू होगी. सूत्रों के मुताबिक आधे से एक घंटे में फैसला आ जाएगा. फैसला करीब 2000 पन्नों में लिखाया गया है. कोर्ट ने सभी 32 अभियुक्तों को कोर्ट में हाज़िर रहने का आदेश दिया है. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, महंत नृत्य गोपाल दास और कल्याण सिंह कोर्ट में हाज़िर नहीं हो रहे हैं.

28 साल पुराने इस मुक़दमे में कुल 49 लोग आरोपी बनाए गए थे, जिसमें से 17 की मौत सुनवाई के दौरान ही हो गई. बाकी बचे 32 आरोपियों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साघ्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डा. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दूबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धमेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ व धर्मेंद्र सिंह गुर्जर शामिल हैं.

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा पर आईपीसी की धारा 153a, 153b, 505(1), 295a, 147, 148, 149 और 120B में आरोप तय हुए. कल्याण सिंह पर धारा 120B में आरोप तय हुए. बाकी सभी अभियुक्तों पर 395, 153a, 153b, 505(1), 295a, 147, 148, 149 और 120B में आरोप तय हुए.

इन 17 आरोपियों की हो चुकी है मौतइस मामले में इन 17 अभियुक्तों की मुक़दमे के दौरान मृत्यु हो गई- अशोक सिंघल, बालासाहेब ठाकरे, विजय राजे सिंधिया, महंत अवैद्यनाथ, परंम हंस दास चंद्रदास, गिरिराज किशोर, विष्णुहरी डालमिया, मोरेश्वर सावे, विनेाद कुमार वत्स, राम नारायण दास, डीबी दास, हरगोविंद सिंह, लक्ष्मीनारायण दास, रमेश प्रताप सिंह, बैकुंठलाल शर्मा, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि महाराज और डॉक्टर सतीश नागर.

6 दिसंबर 1992 को दर्ज हुई पहली FIR
अयोध्या स्थित विवादित ढांचा गिराए जाने के मामले में 6 दिसंबर 1992 को दो एफआईआर दर्ज हुई. पहली एफआईआर 3:15 पर थाना रामजन्मभूमि के तत्कालीन एसओ प्रियंवदा नाथ शुक्ला ने हज़ारों कारसेवकों के खिलाफ और दूसरी एफआईआर 3:25 पर सब इंस्पेक्टर गंगाप्रसाद तिवारी ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल समेत कई आरोपियों को नामजद करते हुए दर्ज कराई थी.

इसके अलावा अयोध्या के अलग-अलग थानों में 47 एफआईआर मीडिया कर्मियों ने दर्ज कराई थी, जिसमें उनके कैमरे छीने और तोड़े जाने का आरोप था. पहले मामले की जांच 13 दिसंबर 1992 को ही सीबीआई को दी गई, जबकि कुछ समय बाद दूसरे मामले की जांच भी सीबीआई को दे दी गई.

49 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
यह मामला तमाम अदालतों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. 19 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश की धारा 120 लगाने का आदेश दिया और दोनों मुकदमों को एक साथ लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट अयोध्या प्रकरण में चलाने का आदेश भी दिया. इस मामले को 2 साल के भीतर खत्म करने का भी आदेश दिया गया.



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